Religion Conversion in UP: SIT की शुरुआती जांच में पुष्टि, मतांतरण की तकरीर का वीडियो कानपुर के मंडलायुक्त के बंगले का

लखनऊ, जेएनएन। उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर मतांतरण के प्रकरण में वरिष्ठ आइएएस अफसर मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन की संलिप्तता की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव टीम (एसआइटी) की जांच में पुष्टि हो गई है कि मतांतरण के लिए प्रेरित करने वाला वायरल वीडियो कानपुर के कमिश्नर के बंगले का है। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के चेयरमैन के पद पर तैनात मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन करीब तीन वर्ष तक कानपुर में मंडलायुक्त तथा श्रमायुक्त के पद पर तैनात रहे थे।

मतांतरण में संलिप्तता को लेकर कानपुर के पूर्व मंडलायुक्त मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन के वायरल वीडियो को लेकर एसआइटी (विशेषज्ञ जांच दल) की जांच में टीम को सफलता मिलने लगी है। टीम को सात दिन में अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपनी है। एसआइटी के अध्यक्ष व क्राइम ब्रांच क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (सीबीसीआइडी) के महानिदेशक जीएल मीणा के साथ कानपुर जोन के एडीजी भानु भास्कर लगातार इस मामले को खंगालने में लगे हैं। कानपुर के अपर पुलिस आयुक्त आनंद प्रकाश तिवारी ने इस मामले में अभी तक जो भी जांच की है, उसको भी एसआइटी टीम ने अपनी विवेचना में शामिल किया है।

इफ्तिखारुद्दीन के वीडियो की जांच के मामले में एसआईटी के अध्यक्ष जीएल मीणा ने कहा कि ऐसे बयान वाले 50 से ज्यादा है वीडियो मिले हैं, जिनकी जांच बारीकी से कराई जा रही है। वीडियो जांचने का काम 12 टीमें कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह जांच सात दिन के अंदर पूरी हो जाएगी। वायरल वीडियो के सामने आने के बाद कहा गया था कि वीडियो में बोली जा रही अरबी भाषा का हिंदी में ट्रांसलेशन करवाया जाएगा। इफ्तिखारुद्दीन से अभी तक पूछताछ नहीं हुई है। टीम से जुड़े अफसरों का कहना था कि अगर इफ्तिखारुद्दीन ने वीडियो की सत्यता को स्वीकार नहीं किया, तो वीडियो की फोरेंसिक जांच कराई जाएगी।

बड़े पैमाने पर मतांतरण के मामले में मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन से जुड़े कुछ वायरल वीडियो की शुरुआती जांच में पुष्टि हुई है कि वीडियो कानपुर के डिवीजनल कमिश्नर बंगले में बनाया गया था। इस केस में 50 से ज़्यादा वीडियो की जांच जारी है। जांच टीम को अभी तक कुल दो घंटे से ज़्यादा के वीडियो मिले हैं।

डीजी सीबीआइडी जीएल मीणा ने अब इस जांच की गंभीरता को देखते हुए सीबीसीआइडी के एसपी देवेन्द्र नाथ मिश्रा समेत छह अन्य अधिकारियों को भी पड़ताल में लगाया है। डीजी ने सीबीसीआइडी मुख्यालय में तैनात एसपी के अलावा एक एएसपी, सीओ व तीन निरीक्षकों को भी जांच टीम में शामिल किया है। पूरे प्रकरण में मत विशेष का प्रचार व मतांतरण के बिंदुओं पर छानबीन की जाएगी। इसके लिए एसपी से लेकर सभी निरीक्षकों तक को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। एडीजी कानपुर जोन भानु भाष्कर ने भी अपने स्तर से भी कुछ पुलिस अधिकारियों को जांच में सहयोग के लिए जोड़ा है।

इस प्रकरण में मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन की गहन संलिप्तता की और पुष्टि करने के लिए कानपुर के मंडलायुक्त कार्यालय के साथ आवास में तैनात कर्मियों से भी अब पूछताछ होगी। एसआइटी ने मंडलायुक्त कार्यालय व आवास में तैनात पुराने कर्मचारियों से पूछताछ की योजना बना ली है। एसआइटी कर्मचारियों से यह जानना चाहती है कि क्या मंडलायुक्त रहते हुए इफ्तिखारुद्दीन धार्मिक कट्टरता की पाठशाला चलाते थे।

कानपुर के मंडलायुक्त आवास में मतांतरण के लिए प्रेरित करने वाली तकरीरें पढ़ने के आरोपित उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के चेयरमैन मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन को लेकर लगातार नए वीडियो आते जा रहे हैं। यह सभी वीडियो एसआइटी (विशेष जांच दल) तक भी पहुंच रहे हैं। इन सभी की फोरेंसिक जांच भी कराई जा रही है। गुरुवार को वायरल वीडियो में पूर्व कमिश्नर इफ्तिखारुद्दीन जमीन पर बैठे हैं, जबकि एक दूसरा व्यक्ति कमिश्नर आवास पर बैठे लोगों को संबोधित कर रहा है। इफ्तिखारुद्दीन की शान में कसीदे पढ़ते हुए वह कह रहा है कि आइएएस की तकरीरों से जुड़े वीडियो से आमिर खान तो इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने कमिश्नर साहब को खुद फोन किया और बाद में अपने बहनोई को इनसे मिलने के लिए भेजा। कमिश्नर साहब की लिखी कुछ किताबें भी आमिर के बहनोई अपने साथ ले गए। दूसरी ओर इसी वीडियो में तकरीर करता हुआ शख्स यह भी कह रहा कि कमिश्नर साहब की तकरीर से शाहरुख खान भी इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने कुरआन पढ़ना शुरू कर दिया। वीडियो में यह नहीं बताया गया कि आमिर खान और शाहरुख कौन हैं। इस नए वीडियो को भी एसआसइटी ने अपनी जांच में शामिल कर लिया है। इस वीडियो को जांच के लिए फोरेंसिक लैब के लिए भेजा जाएगा। एसआइटी के पास अब तक चार वीडियो पहुंच चुके हैं।

गौरतलब है कि मोहम्मद इफितखारुद्दीन 17 फरवरी 2014 से 22 अप्रैल 2017 तक कानपुर के मंडलायुक्त रहे हैं। वह यहां पर प्रदेश के श्रमायुक्त का पदभार संभाल चुके हैं। मतांतरण के मामले में उनसे जुड़े जो वीडियो वायरल हो रहे हैं वह उस समय के हैं जब वो कानपुर के मंडलायुक्त थे।