Reka engaged in promotion of Tibeto-Indian culture – Dalai Lama comes forward to save Indian-origin woman’s cafe from being closed in Scotland | स्कॉटलैंड में भारतीय मूल की महिला का कैफे बंद होने से बचाने दलाई लामा आगे आए

  • Hindi News
  • International
  • Reka Engaged In Promotion Of Tibeto Indian Culture Dalai Lama Comes Forward To Save Indian origin Woman’s Cafe From Being Closed In Scotland

लंदन9 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक
दलाई लामा के साथ रेका। - Dainik Bhaskar

दलाई लामा के साथ रेका।

स्कॉटलैंड की राजधानी एडिनबरा की साउथ क्लर्क स्ट्रीट पर तिब्बती संस्कृति को बढ़ावा देने वाला हिमालय कैफे बंद होने की कगार पर है। इसे बंद होने से बचाने के लिए तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा भी आगे आए हैं। उन्होंने कैफे को बचाने के लिए शुरू हुए फंडरेजिंग अभियान को समर्थन दिया है। मसूरी में पैदा हुईं रेका गावा ने दलाई लामा से मुलाकात के बाद यह कैफे खोला था।

इस कैफे में ध्यान के लिए अलग कमरा भी है। रेका ने यह भवन किराए पर ले रखा था। पर इसके मालिक अब संपत्ति बेचना चाहते हैं। 39 साल की रेका इसे खरीदना चाहती हैं, पर वे आर्थिक रूप से मजबूत नहीं हैं। पढ़िए, क्यों ये कैफे अहम है और रेका इसे बचाने में किस तरह जुटी हैं…

कर्ज और दोस्तों से उधार लेकर कैफे बचाने की कोशिश में हूं: रेका

मेरा जन्म मसूरी में हुआ था, बचपन वहीं बीता। जब मैं 13 साल की थी, तब हमारा परिवार डेनमार्क चला आया। 22 साल की उम्र में मुझे स्कॉटलैंड की संसद में कैटरिंग का काम मिला। वहां पर जॉर्ज रीड को रोजाना काफी सर्व करती थी। एक बार उन्होंने पूछा, ‘दलाई लामा को जानती हो, मिलना चाहती हो।’ वह जानते थे कि मैं तिब्बत से हूं। मैं नि:शब्द हो गई थी। अगले दिन मैं पारंपरिक तिब्बती परिधान ‘चुपा’ में संसद पहुंची। मैं घबराई हुई थी। अभी तक उन्हें सिर्फ तस्वीरों में देखा था। लॉबी में दलाई लामा को देख आंसू झरने लगे।

उन्होंने मुझसे पूछा कि कहां से हो, स्कॉटलैंड में कब से हो। जाते-जाते उन्होंने मुझसे कहा कि तिब्बती संस्कृति को बढ़ावा देना जरूरी है। मैंने उन्हें वादा किया कि स्कॉटलैंड में रहकर तिब्बती और भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देना मेरी प्राथमिकता रहेगी। मैंने संसद की नौकरी छोड़कर 2007 में ‘हिमालय कैफे’ शुरू किया।

वहीं, ‘पे इट फॉरवर्ड’ योजना के तहत कैफे से संपन्न लोग गरीबों और बेघरों के लिए खाना खरीदते हैं। मैं इस भवन को खरीदने की कोशिश कर रही हूं ताकि 14 साल की ये बॉन्डिंग खत्म न हो। बैंक से लोन, दोस्तों से उधार लिया है। फिर भी करीब 46 लाख रुपए की जरूरत है। मैंने पैसे जुटाने के लिए अभियान भी शुरू किया है। दलाई लामा के समर्थन के बाद उम्मीद जगी है, लोग मदद के लिए आ रहे हैं।’– रेका गावा

खबरें और भी हैं…