More effective treatment of Alzheimer: अल्जाइमर दुनिया के लिए गंभीर समस्या बनती जा रही है. पश्चिमी देशों में 50 के बाद अधिकांश लोग इस बीमारी के शिकार हो जाते हैं. इसमें याददाश्त कमजोर होने लगती है और अक्सर लोग भूलने लगते हैं. इस बीमारी का अब तक कोई ठोस इलाज नहीं है. कुछ थेरेपी की मदद से इसे काबू में लाने की कोशिश की जाती है, लेकिन पूरी तरह से इस बीमारी को वैज्ञानिक समझ भी नहीं पाए हैं. टाइम्स नाउ की खबर के अनुसार उपशाला यूनिवर्सिटी (Uppsala University ) के शोधकर्ताओं ने एक नई एंटीबॉडी को डिजाइन करने का दावा किया है, जो अल्जाइमर बीमारी से लड़ने में कारगर हथियार बन सकती है. इस शोध से अल्जाइमर मरीजों में कुछ उम्मीद जगी है. अध्ययन के नतीजों को ट्रांसलेशनल न्यूरोडिजेनरेशन (Translational Neurodegeneration) जर्नल में प्रकाशित किया गया है.
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टॉक्सिन को बांध देगी एंटीबॉडी
शोधकर्ताओं ने कहा है कि जिस एंटीबॉडी को डिजाइन किया गया है, वह एमेलॉयड बीटा प्रोटीन (amyloid-beta protein) के गुच्छे को बांध देती है. एमेलॉयड बीटा प्रोटीन के कारण ही दिमाग के एक खास हिस्से में टॉक्सिन बनने लगते हैं जिसके कारण याददाश्त जाने लगती है या स्मृति लोप होने लगता है. अब तक जो इलाज है, उसमें बीमारी पर सीमित प्रभाव पड़ता है. इसके नहीं काम करने के कई कारण हैं. इसका सबसे प्रमुख कारण है कि जिस एंटीबॉडी का इस्तेमाल किया जाता है, वह सभी प्रकार के टॉक्सिन को बांधने में नाकाम रहती है. नई एंटीबॉडी सभी प्रकार के टॉक्सिन को बांध देती है जिसके कारण दिमाग में टॉक्सिन का रिसाव नहीं होता.
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अल्जाइमर के लिए प्रोटीन का गुच्छा है दोषी
एमेलॉयड बीटा प्रोटीन दिमाग में गुच्छा बनने लगता है. इसे प्लाक भी कहते हैं. यानी प्रोटीन का जमावड़ा. इस प्रक्रिया को एग्रेगेशन (aggregation) कहते हैं और इसे एग्रीगेट्स भी कहा जाता है. यह प्रोटीन का गुच्छा मस्तिष्क में बिना मतलब जमा होने लगता है. वैज्ञानिक अल्जाइमर के लिए इसी गुच्छे को दोषी मानते हैं. इससे पहले वैज्ञानिकों ने पेप्टाइड सोमेटोसटैटिन (peptide somatostatin) पद्धति से इलाज किया था, जिसमें एग्रीगेट्स को तोड़ने में मदद मिली. नई एंटीबॉडी के माध्यम से इस एग्रीगेट्स को बांधने में मदद मिलेगी जिससे प्रोटीन का गुच्छा दिमाग में रिसेगा ही नहीं.
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