Eco Friendly Lifestyle With Rain Water Harvesting, Herbal Garden At Home

गांव में आज भी छोटी-मोटी बिमारियों के इलाज के लिए लोग प्रकृति का सहारा लेते हैं। कई ऐसे औषधीय पौधे हैं, जिनका उपयोग हमारे देश में सालों से होता आ रहा है। ऐसे औषधीय पौधे हमारे स्वास्थ्य के लिए तो फायदेमंद होते ही हैं। साथ ही पर्यावरण के लिए भी अच्छे होते हैं। वहीं शहरों में हमें ऐसे पेड़-पौधे देखने को कम ही मिलते हैं। लेकिन आज हम आपको राजकोट के एक ऐसे शख़्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने शहर में ही एक सुन्दर बगीचा बनाया है और उसमें कई तरह की मौसमी सब्जियां व औषधीय पेड़-पौधे भी लगाए हैं। 

पेशे से व्यवसायी जयेशभाई, सभी जड़ी-बूटियों के उपयोग के बारे में अच्छी जानकारी रखते हैं और परिवारवालों, आस-पड़ोस के लोगों व दोस्तों को इनके उपयोग की जानकारी देते हैं। तो आइए मिलते हैं राजकोट जैसे आधुनिक शहर में पर्यावरण के अनुकूल जीवन जीने वाले जयेशभाई रादड़िया से।

राजकोट में आठ साल पहले, जब उन्होंने अपना घर बनवाया था, तभी फैसला कर लिया था कि इसमें वह ज्यादा से ज्यादा प्राकृतिक चीजों का उपयोग करेंगे। उनके घर में उजाले से लेकर, पानी गर्म करने और खाना बनाने तक सबके लिए सूर्य की रोशनी का उपयोग होता है।

द बेटर इंडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया, “मेरे घर में बनीं बड़ी-बड़ी खिड़कियों से दिन के समय में अच्छी रोशनी और रात को ठंडी हवा मिलती है। इसकी वजह से बिजली का उपयोग भी काफी कम होता है।”

Rajkot eco-friendly home with big windows
जयेशभाई का घर

माँ से सीखी बागवानी 

herbal garden at home along with rain water harvesting

जयेशभाई, घर में रोजमर्रा की सब्जियों के अलावा, कई नई किस्मों की सब्जियां भी उगाते हैं और फिर इसका उपयोग आए दिन नई-नई डिशेज बनाने में करते हैं। उदाहरण के लिए घर में उगाए गए बांस से अचार बनाया जाता है। कई सब्जियों को सोलर कुकर में सुखाकर, सालभर इनका इस्तेमाल किया जाता है। वहीं, वह बाजार से सिर्फ आलू, प्याज और टमाटर ही खरीदते हैं। बाकी सभी सब्जियां उन्हें घर के बगीचे से ही मिल जाती हैं। 

चूँकि, जयेशभाई की माँ को पहले से ही बागवानी का शौक़ रहा है। इसलिए उनसे ही प्रेरणा लेकर, वह बागवानी करते हैं। इसमें उनकी माँ और पत्नी उनका पूरा-पूरा साथ देती हैं। समय-समय पर पौधों में खाद और पानी डालने जैसे काम उनकी माँ ही संभाल लेती हैं। 

जयेशभाई के घर में 130 से अधिक जड़ी-बूटियों के 400 से अधिक पौधे हैं, जिनमें कंठ, तीन प्रकार की तुलसी, अस्थि जंजीर, लक्ष्मीतरु, काली मिर्च, चनोठी, अर्जुन शामिल हैं। वह खुद तो इसका इस्तेमाल करते ही हैं। साथ ही, इन सभी जड़ी-बूटियों की अच्छी जानकारी होने के कारण जरूरत पड़ने पर इसे अपने आसपास के लोगों को भी देते हैं।

इसके अलावा उन्होंने मिर्च, बैंगन, गाजर, तुरई, लौकी, पालक समेत कई सब्जियां भी लगाई हैं। उन्होंने बताया, “हमने घर पर कसावा भी लगाया है, जिसका इस्तेमाल कॉफी बनाने के लिए किया जा सकता है और इसके कई आयुर्वेदिक फायदे हैं।”

घर में  किचन वेस्ट से कंपोस्टिंग का काम होता है। ताकि इन सभी पौधों के लिए उन्हें घर में ही कम्पोस्ट मिल सके। इसके लिए उन्होंने अपने बगीचे में एक गड्ढा बनाया है, जहां वह खाद बनाते हैं। वहीं, पेड़-पौधों को कीड़ों से बचाने के लिए  वह घर पर किटनाशक भी बनाते हैं। अपने ऑर्गेनिक गार्डन में वह नीम के तेल का छिड़काव करते हैं। 

जयेशभाई के घर में 700 गज की बड़ी जगह है, जहां उन्होंने ये पेड़-पौधे लगाए हैं। इसके अलावा, उन्होंने छत पर ग्रोबैग्स और गमलों में भी कई पौधे लगाए हैं।

eco-friendly lifestyle gardening

रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से बोरवेल में सालभर रहता है पानी 

जयेशभाई चाहते थे कि वह अपनी जरूरतों के लिए ज्यादा से ज्यादा प्राकृतिक साधनों का उपयोग करें। इसलिए उन्होंने घर बनवाते समय रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी बनवाया था। इसकी वजह से बारिश के पानी से जमीन का जलस्तर अच्छा बना रहता है। वह कहते हैं, “उनके घर में बोरवेल का स्तर हमेशा ऊंचा रहता है और सालभर अच्छी गुणवत्ता वाला पानी मिलता है।”

जयेशभाई की राय है कि सरकार को अब देश के हर गांव और कस्बे में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य कर देना चाहिए। ताकि बारिश का पानी नदियों और नालों में न बहे। इससे जमीन का जल स्तर तो सुधरेगा ही, साथ ही बाढ़ का जोखिम भी कम हो जाएगा। 

उनके रेन वॉटर हार्वेस्टिंग की वजह से, इलाके में कई घरों के बोरवेल में जल स्तर बढ़ गया है। 

सोलर एनेर्जी का होता है सही इस्तेमाल 

वह कहते हैं, “चूँकि गुजरात में साल के ज्यादातर समय अच्छी धूप मिलती है। इसलिए हम पिछले 20 सालों से सोलर कुकर का उपयोग कर रहे हैं। इससे गैस की काफी बचत भी होती हैं।” सोलर कुकर के अलावा गर्म पानी के लिए छत पर सोलर हीटर भी लगा है। इतना ही नहीं, उन्होंने बताया कि जल्द ही वह घर की बिजली की जरूरतों के लिए सोलर पैनल भी लगवाने वाले हैं। इससे गैस के साथ-साथ बिजली का खर्च भी कम हो जाएगा। 

herbal garden created with rain water gharvesting

जयेशभाई का जन्म स्थान राजकोट से 120 किलोमीटर दूर जामका गांव में है। वहां, उनके खेतों पर सालों से सिर्फ जैविक खेती की जा रही है।

गांव में पले-बढ़े होने के कारण उनका जीवन प्रकृति से जुड़ा हुआ है। वह मानते हैं कि पृथ्वी को भविष्य में बड़े खतरे से बचाने ले लिए हमें प्लास्टिक का उपयोग बंद करना होगा। वह अपने घर में कम से कम प्लास्टिक का उपयोग करते हैं  और जितना हो सके प्लास्टिक को रीसायकल करने का प्रयास करते हैं। बाजार जाते समय कपड़े की थैली साथ रखना, उनकी जीवनशैली का हिस्सा हैं। इसलिए उन्हें बहुत जगहों पर प्लास्टिक की जरूरत पड़ती ही नहीं।  

जयेशभाई ने अपने इन प्रयासों से साबित किया है कि कुछ छोटे-छोटे बदलाव लाकर,  हम पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ अपने स्वास्थ्य की देखभाल और पैसों की बचत भी कर सकते हैं।  

संपादन – अर्चना दुबे

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