Chandigarh, Issue Of Evacuation 81 Outsourced Personnel, Health Department, Reached Rashtrapati Bhavan, – स्वास्थ्य विभाग के 81 आउटसोर्स कर्मियों को निकालने का मुद्दा राष्ट्रपति भवन पहुंचा

ख़बर सुनें

चंडीगढ़। कोरोना काल में आउटसोर्स पर रखे गए कर्मचारियों को निकाले जाने का मामला जोर पकड़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से निकाले गए कर्मचारियों ने इसकी शिकायत राष्ट्रपति भवन भेजकर न्याय की गुहार लगाई है। वहीं, स्वास्थ्य सचिव की ओर से मामले में सितंबर माह में की गई भर्तियों का ब्योरा तलब करने के आदेश से विभाग में हड़कंप मच गया है। रविवार का दिन होने के बावजूद नई नियुक्तियों का ब्योरा खंगाला गया।
इस मामले पर स्वास्थ्य विभाग का कोई अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं है। कहा जा रहा है कि स्वास्थ्य सचिव को सभी ब्योरा जल्द उपलब्ध करा दिया जाएगा। चर्चा है कि अगर मानकों की अनदेखी सामने आई तो नई नियुक्तियां रद्द की जा सकती हैं।
पुनर्नियोजन पर रोक की मांग
स्वास्थ्य विभाग के आउटसोर्स पर निकाले गए 81 कर्मचारियों के मामले को देखते हुए केंद्र सरकार और प्रशासन से पुनर्नियोजन से नियुक्तियां बंद करने की मांग की गई है। शिकायत में कहा गया है कि सेवानिवृत्त को मनचाहे पदों पर भर्ती कर युवाओं को रोजगार से वंचित रखने की साजिश रची जा रही है। यह भी आरोप है कि पूर्व निदेशक स्वास्थ्य ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में नियमों को दरकिनार कर कई नई नियुक्तियां की हैं। उनकी भी जांच की जानी चाहिए। प्रशासन ने यह रिकॉर्ड जल्द सौंपने का आदेश दिया है।
बहुत पहले से चल रहा है नियुक्तियों में खेल
स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स पर रखे गए डॉक्टर व अन्य कर्मचारियों की नियुक्तियों में पहले से ही खेल चल रहा था। इसमें पुनर्नियोजन पर मनचाहे पदों पर तैनाती के साथ बिना जरूरत के डेंटल सर्जन की भर्ती संबंधी मामला चर्चा में रहा है। सूत्रों का कहना है कि आउटसोर्स पर रखे गए डाटा एंट्री ऑपरेटर और सुरक्षाकर्मियों की भर्ती में भी मानकों का पालन नहीं किया गया। यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि इसकी जानकारी होने पर स्वास्थ्य सचिव ने पहले ही यह आदेश जारी किया है कि उनके स्तर पर ली जाने वाली परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर ही सेवा नियमित करने का निर्णय लिया जाएगा।
कोट-
भर्तियों के संबंध में पत्र जारी कर जवाब मांगा गया है। जांच में जो भी सामने आएगा, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
यशपाल गर्ग, स्वास्थ्य सचिव, यूटी प्रशासन

चंडीगढ़। कोरोना काल में आउटसोर्स पर रखे गए कर्मचारियों को निकाले जाने का मामला जोर पकड़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से निकाले गए कर्मचारियों ने इसकी शिकायत राष्ट्रपति भवन भेजकर न्याय की गुहार लगाई है। वहीं, स्वास्थ्य सचिव की ओर से मामले में सितंबर माह में की गई भर्तियों का ब्योरा तलब करने के आदेश से विभाग में हड़कंप मच गया है। रविवार का दिन होने के बावजूद नई नियुक्तियों का ब्योरा खंगाला गया।

इस मामले पर स्वास्थ्य विभाग का कोई अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं है। कहा जा रहा है कि स्वास्थ्य सचिव को सभी ब्योरा जल्द उपलब्ध करा दिया जाएगा। चर्चा है कि अगर मानकों की अनदेखी सामने आई तो नई नियुक्तियां रद्द की जा सकती हैं।

पुनर्नियोजन पर रोक की मांग

स्वास्थ्य विभाग के आउटसोर्स पर निकाले गए 81 कर्मचारियों के मामले को देखते हुए केंद्र सरकार और प्रशासन से पुनर्नियोजन से नियुक्तियां बंद करने की मांग की गई है। शिकायत में कहा गया है कि सेवानिवृत्त को मनचाहे पदों पर भर्ती कर युवाओं को रोजगार से वंचित रखने की साजिश रची जा रही है। यह भी आरोप है कि पूर्व निदेशक स्वास्थ्य ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में नियमों को दरकिनार कर कई नई नियुक्तियां की हैं। उनकी भी जांच की जानी चाहिए। प्रशासन ने यह रिकॉर्ड जल्द सौंपने का आदेश दिया है।

बहुत पहले से चल रहा है नियुक्तियों में खेल

स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स पर रखे गए डॉक्टर व अन्य कर्मचारियों की नियुक्तियों में पहले से ही खेल चल रहा था। इसमें पुनर्नियोजन पर मनचाहे पदों पर तैनाती के साथ बिना जरूरत के डेंटल सर्जन की भर्ती संबंधी मामला चर्चा में रहा है। सूत्रों का कहना है कि आउटसोर्स पर रखे गए डाटा एंट्री ऑपरेटर और सुरक्षाकर्मियों की भर्ती में भी मानकों का पालन नहीं किया गया। यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि इसकी जानकारी होने पर स्वास्थ्य सचिव ने पहले ही यह आदेश जारी किया है कि उनके स्तर पर ली जाने वाली परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर ही सेवा नियमित करने का निर्णय लिया जाएगा।

कोट-

भर्तियों के संबंध में पत्र जारी कर जवाब मांगा गया है। जांच में जो भी सामने आएगा, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

यशपाल गर्ग, स्वास्थ्य सचिव, यूटी प्रशासन