Bihar Politics Kanhaiya Kumar will be the trump card for Bihar Congress may be sent to Rajya Sabha

वाम नेता डा. कन्‍हैया कुमार के कांग्रेस में शामिल होने को लेकर पार्टी खुश है। कांग्रेस को उम्‍मीद है कि उनके शामिल होने से बिहार में एक बड़ा चेहरा मिल जाएगा। कांग्रेस की बड़ी चिंता भाजपा का बढ़ता कद। सहयोगियों से सीटों के बारगेन में पार्टी को होगी सहूलियत

सुनील राज, पटना। जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष और वाम नेता कन्हैया कुमार (Dr Kanhaiya Kumar) कांग्रेस के साथ अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत करेंगे। मंगलवार को वे विधिवत दिल्ली में कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) व अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण करेंगे। बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष डा. मदन मोहन झा भी इस मौके के गवाह बनेंगे। वे अभी से कुछ देर पहले दिल्ली के लिए प्रस्थान कर गए हैं। छात्र नेता रहते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की तीखी आलोचना करने वाले कन्हैया की कांग्रेस में इंट्री को लेकर जानकार मानते हैं कि इस बहाने कांग्रेस को बिहार में एक कद्दावर और नरेंद्र मोदी पर हमला करने वाला नेता मिल जाएगा। चर्चा है कि कांग्रेस कन्हैया को राज्यसभा भेजेगी, लेकिन एक चर्चा यह भी है कि कन्हैया बिहार में कांग्रेस के लिए तुरुप का पत्ता बनेंगे। 

भाजपा के बढ़ते कद से बढ़ी है कांग्रेस की चिंता 

असल में कांग्रेस की बड़ी चिंता बिहार में भाजपा का बढ़ता कद है। पिछले कुछ वर्षों में बिहार में भाजपा ने विधानसभा चुनाव में अपनी ताकत मजबूत की है जबकि कांग्रेस इस दौर में पिछड़ती गई है। 2015 में कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में 27 सीटें थी जो 2020 में घटकर 19 रह गई। वहीं भाजपा की सीटें 55 से बढ़कर 74 पर पहुंच गई हैं। कांग्रेस को बिहार में पार्टी को बुरे दौर से निकालने के लिए किसी बड़े चेहरे की तलाश थी जो कन्हैया के एक हद तक पूरी होने जा रही है। कन्हैया जिस जाति से आते हैं बिहार में उसका बड़ा वोट बैंक है। इस लिहाज से भी कांग्रेस के लिए यह मुफीद सौदा है। 

लालू प्रसाद के रहमोकरम पर रही पार्टी 

विश्लेषक भी मानते हैं कि डा. जगन्नाथ मिश्रा के बाद बिहार कांग्रेस को उस कद का कोई नेतृत्व करने वाले नेता नहीं मिला। जिसका खामियाजा पार्टी का उठाना पड़ा। सत्येंद्र नारायण सिन्हा के बाद कांग्रेस की राजनीति राजद जैसे दल पर आश्रित होकर रह गई। लालू प्रसाद के रहमोकरम पर कांग्रेस को विधानसभा चुनाव के लिए सीटें मिली। नतीजा कांग्रेस अपनी जमीन से कटती चली गई। कन्हैया की बदौलत सहयोगी दलों से कांग्रेस को सीटों के बारगेन में सहूलियत हो जाएगी। एक चर्चा यह भी थी कि कांग्रेस के कुछ स्थानीय स्तर के नेता आलाकमान के इस फैसले से खुश नहीं। पार्टी विधानमंडल दल के नेता अजीत शर्मा कहते हैं जो लोग ऐसा सोचते हैं उन्होंने आज तक पार्टी की विचारधारा को ठीक से समझा नहीं। कांग्रेस सबको साथ लेकर चलती है। कन्हैया के कांग्रेस के साथ आने से निश्चित रूप से पार्टी की बिहार में ताकत बढ़ेगी।